cgdemandium.com
राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय ख़बरें

Water Crisis in India: आबादी बढ़ी, पानी घटा! जल संसाधनों पर बढ़ते दबाव ने बढ़ाई चिंता

30A 235


 नई दिल्ली

भारत इस समय दुनिया के सबसे बड़े जल संकट की ओर बढ़ रहा है. आबादी और पानी के संसाधनों के बीच का असंतुलन देश के भविष्य, इंफ्रास्ट्रक्चर और अर्थव्यवस्था के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती बन चुका है. दुनिया की लगभग 18% आबादी भारत में रहती है, लेकिन हमारे पास दुनिया के कुल पीने वाले पानी का सिर्फ 4% हिस्सा ही मौजूद है। 

तेजी से हो रहे शहरीकरण, औद्योगीकरण और जलवायु परिवर्तन के दबाव के कारण मौजूदा संसाधनों पर बोझ बढ़ रहा है. विशेषज्ञों का कहना है कि पानी की मांग और आपूर्ति के बीच का अंतर बढ़ रहा है, जिसके लिए आने वाले दशक में भारी निवेश की ज़रूरत होगी। 

PL Capital की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2030 तक भारत में पानी की मांग उपलब्ध आपूर्ति से दोगुनी हो सकती है. इससे अगले 10 सालों में वॉटर ट्रीटमेंट, वेस्टवॉटर रीसाइक्लिंग, सीवेज इंफ्रास्ट्रक्चर, डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क और स्टोरेज सिस्टम में लगभग ₹20 लाख करोड़ के निवेश का मौका बन सकता है। 

आर्थिक उतार-चढ़ाव के साथ बदलने वाले कई इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर के उलट, पानी की सुरक्षा में निवेश मुख्य रूप से स्ट्रक्चरल कारणों से बढ़ रहा है. बढ़ती आबादी, शहरों का विस्तार, औद्योगिक विकास, भूजल में कमी और पर्यावरण से जुड़े कड़े नियम ये सभी भारत के सीमित मीठे पानी के संसाधनों पर दबाव बढ़ा रहे हैं। 

PL Capital में एडवाइजरी के चीफ बिजनेस ऑफिसर विक्रम कसात ने कहा, “भारत में पानी एक अहम रणनीतिक संसाधन बनता जा रहा है. इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े दूसरे ट्रेंड्स, जो आर्थिक चक्रों से जुड़े हो सकते हैं, उनके उलट पानी की सुरक्षा में निवेश स्ट्रक्चरल और पॉलिसी पर आधारित होता है और टिकाऊ विकास के लिए ज़रूरी है। 

सीवेज को ट्रीट करने की क्षमता कम 
भारत में अभी हर दिन 72,000 मिलियन लीटर से ज़्यादा सीवेज पैदा होता है, लेकिन इसे ट्रीट करने की क्षमता काफी नहीं है. इस वजह से बड़ी मात्रा में बिना ट्रीट किया हुआ वेस्टवॉटर नदियों और दूसरे जल स्रोतों में बहा दिया जाता है. आने वाले सालों में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट और वेस्टवॉटर रीसाइक्लिंग सुविधाओं का विस्तार इंफ्रास्ट्रक्चर पर होने वाले खर्च का एक बड़ा हिस्सा बनने की उम्मीद है। 

रिपोर्ट में पानी की ज्यादा खपत वाले कई उद्योगों के उभरने की ओर भी इशारा किया गया है, जिनसे अच्छी क्वालिटी वाले इंडस्ट्रियल पानी की मांग बढ़ने की उम्मीद है. डेटा सेंटर, सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स प्रोडक्शन, ग्रीन हाइड्रोजन प्रोजेक्ट और स्पेशलिटी केमिकल्स इन सभी में बहुत ज़्यादा शुद्ध पानी की ज़रूरत होती है. इससे पानी को शुद्ध करने और रीसाइक्लिंग टेक्नोलॉजी से जुड़ी कंपनियों के लिए नए मौके बन रहे हैं। 

PL Capital की एक नई थीम-बेस्ड रिपोर्ट के अनुसार, 2030 तक भारत में पानी की मांग उपलब्ध सप्लाई से दोगुनी हो सकती है. इससे अगले 10 सालों में वॉटर ट्रीटमेंट, वेस्टवॉटर रीसाइक्लिंग, सीवेज इंफ्रास्ट्रक्चर, डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क और स्टोरेज सिस्टम में ₹20 लाख करोड़ के निवेश का मौका बन सकता है। 

इकोनॉमिक साइकल के साथ बदलने वाले कई इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर के उलट, वॉटर सिक्योरिटी में निवेश अब स्ट्रक्चरल वजहों से बढ़ रहा है. आबादी का बढ़ना, शहरों का विस्तार, इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट, ग्राउंडवॉटर का कम होना और पर्यावरण से जुड़े कड़े नियम ये सभी भारत के सीमित मीठे पानी के संसाधनों पर दबाव बढ़ा रहे हैं। 



Related posts

Thalapathy Vijay Promise: स्कूलों में हर हफ्ते चिकन बिरयानी देने का ऐलान, TVK सरकार की बड़ी तैयारी

News Desk

संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही स्थगित: लोकसभा में सदन में विपक्षी सांसदों हंगामा; JPC जांच की मांग के नारे लगाए

News Desk

29 दिन का होगा सावन, श्रावण सोमवार पर बन रहे दुर्लभ संयोग, बरसेगी शिव कृपा

Muskan Sharma