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Tussar Worm Farming Changed Destiny: टसर कृमिपालन ने बदली तकदीर…पलायन से मिली मुक्ति…आत्मनिर्भर हुए ध्रुवकुमार

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रायपुर:       सारंगढ-बिलाईगढ़ जिले के बरमकेला विकासखंड के ग्राम सण्डा (तोरना) के निवासी ध्रुव कुमार की कहानी आज ग्रामीण आत्मनिर्भरता की प्रेरक मिसाल बन गई है। कभी रोजगार के अभाव में गांव छोड़कर मजदूरी करने को मजबूर रहने वाले ध्रुव कुमार ने रेशम विभाग की टसर कृमिपालन योजना से जुड़कर अपनी जीवन दिशा ही बदल दी।

पहले सीमित और अनिश्चित मजदूरी से परिवार का पालन-पोषण करना कठिन था। लेकिन परिस्थितियों के आगे हार मानने के बजाय ध्रुव कुमार ने अतिरिक्त आय के साधन की तलाश की और रेशम प्रभाग की टसर कृमिपालन योजना से जुड़ गए। टसर कोसाफल के उत्पादन और विक्रय से उन्हें नियमित और बेहतर आमदनी मिलने लगी। इसका परिणाम यह हुआ कि अब उनके परिवार के किसी भी सदस्य को मजदूरी के लिए गांव छोड़कर बाहर नहीं जाना पड़ता।

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पिछले तीन वर्षों में उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वर्ष 2022-23 में 1,19,340 रुपये, वर्ष 2023-24 में 1,27,731 रुपये, वर्ष 2024-25 में 3,21,058 रुपये तथा वर्ष 2025-26 में अब तक 1,73,320 रुपये की आय अर्जित कर चुके हैं। इस आय से उन्होंने अपना कच्चा मकान पक्का कराया और दैनिक उपयोग के लिए नई मोटरसायकल भी खरीदी।
टसर कृमिपालन से प्राप्त आय को ध्रुव कुमार अपने कृषि कार्य में भी निवेश कर रहे हैं, जिससे उन्हें अतिरिक्त लाभ मिल रहा है। आज उनकी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ है और वे अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध करा पा रहे हैं।
कम लागत में अधिक लाभ देने वाली टसर कृमिपालन योजना ने न केवल ध्रुव कुमार को आत्मनिर्भर बनाया है, बल्कि उन्हें पलायन से मुक्ति दिलाकर सम्मानजनक जीवन भी प्रदान किया है।



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