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ख्वाजा आसिफ के बयान पर भारत सख्त, सरकारी सूत्रों ने लगाई कड़ी फटकार

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नई दिल्ली
सेशेल्स के नए राष्ट्रपति सम्मान को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर टिप्पणी करना पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ को भारी पड़ गया है। भारत सरकार ने उनके इस बयान पर बेहद तीखा और कड़ा पलटवार किया है। सरकारी सूत्रों ने ख्वाजा आसिफ की मानसिक स्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा है कि उनके पास कोई काम धंधा नहीं है और वे उन मामलों पर बचकाने कमेंट करके अपना वक्त काट रहे हैं, जिनकी उन्हें रत्ती भर भी समझ नहीं है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, भारत सरकार के उच्च पदस्थ सूत्रों ने पाकिस्तानी रक्षा मंत्री को आड़े हाथों लिया। सूत्रों ने तंज कसते हुए कहा कि ख्वाजा आसिफ को रक्षा मंत्रालय जैसी बड़ी जिम्मेदारी मिलना ही आज के पाकिस्तान के बदतर हालात को बयां करता है।

भारत सरकार के सूत्रों ने कहा, “यह हर कोई जानता है कि ख्वाजा आसिफ मानसिक रूप से अस्थिर हैं। उन्हें मौजूदा जिम्मेदारी सौंपा जाना आज के पाकिस्तान के बारे में बहुत कुछ बताता है। साफ है कि उनके पास दिन भर करने के लिए कोई काम नहीं है। वे उन चीजों पर फालतू की टिप्पणी करके समय बर्बाद करते हैं, जिनका उन्हें कोई ज्ञान नहीं है। नफरत से भरे किसी व्यक्ति के भीतर से जब ईर्ष्या (जलन) बाहर आती है, तो वह बहुत ही घटिया लगती है।”

यह तीखी प्रतिक्रिया तब आई जब आसिफ ने पीएम मोदी को मिले सेशेल्स के सम्मान का मजाक उड़ाया था और इसे ‘पहले से सेटिंग करके’ तैयार किया गया सम्मान बताया था।

पीएम मोदी को मिला है सेशेल्स का सर्वोच्च सम्मान
दरअसल, पिछले हफ्ते सेशेल्स के दौरे पर गए पीएम मोदी को वहां के नए राष्ट्रपति सम्मान ‘गार्जियन ऑफ द ब्लू होराइजन’ से नवाजा गया था। पर्यावरण संरक्षण और छोटे द्वीपीय देशों के विकास में उनके योगदान के लिए उन्हें यह सम्मान दिया गया।

पीएम मोदी इस पुरस्कार को पाने वाले दुनिया के पहले नेता बने हैं। दिलचस्प बात यह है कि सेशेल्स सरकार ने पीएम मोदी के दौरे से कुछ हफ्ते पहले ही अपनी पुरानी पुरस्कार प्रणाली को बदलकर इस नए राष्ट्रीय सम्मान की शुरुआत की थी।

अवॉर्ड पर क्यों हुआ विवाद?
इस अवॉर्ड को लेकर भारत के भीतर भी सियासी घमासान मचा हुआ है। विपक्षी दलों ने सोशल मीडिया पर इस अवॉर्ड के ऑफिशियल साइटेशन (प्रशस्ति पत्र) की एक तस्वीर शेयर करते हुए दावा किया था कि इसमें स्पेलिंग और टाइपिंग की कई गलतियां हैं। विपक्ष का यह भी आरोप था कि इस सर्टिफिकेट को AI टूल्स की मदद से जल्दबाजी में तैयार किया गया है।

विवाद बढ़ता देख सेशेल्स सरकार ने खुद सामने आकर सफाई दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह सम्मान पूरी तरह असली और प्रामाणिक है। उन्होंने बताया कि देश में पुराना अवॉर्ड सिस्टम राजनीतिक विवादों के कारण रद्द कर दिया गया था और नया सिस्टम बनाया जा रहा था। इस नए सम्मान को वहां की कैबिनेट ने 24 जून को ही मंजूरी दी थी, यानी पीएम मोदी के पहुंचने से महज कुछ दिन पहले।

गलतियों के मुद्दे पर सेशेल्स ने माना कि जो तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हुई, वह दरअसल एक ‘वर्किंग ड्राफ्ट’ थी जो गलती से बाहर आ गई। अब असली और पूरी तरह जांचा हुआ सर्टिफिकेट जारी कर दिया गया है। समय की कमी के कारण इस सर्टिफिकेट को बनाने में डिजिटल डिजाइन टूल्स (AI) की मदद ली गई थी।

इस बीच, सत्ताधारी भाजपा ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि पीएम मोदी को उनकी ‘ग्रीन लीडरशिप’ के लिए यह सम्मान मिलना पूरे देश के लिए एक बेहद गर्व का क्षण है।



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