cgdemandium.com
राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय ख़बरें

Bastar Pandum: बस्तर की जनजातीय विरासत के साक्षी बने अमित शाह, विजेता दलों का बढ़ाया हौसला

bastar pandum amit sha4


रायपुर: संभाग स्तरीय बस्तर पंडुम 2026 के समापन अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री  अमित शाह ने लालबाग मैदान में आयोजित जनजातीय परंपराओं और संस्कृति पर आधारित प्रदर्शनी का अवलोकन किया। उन्होंने विभिन्न स्टॉलों का भ्रमण कर जनजातीय समाज के जीवन में उपयोग होने वाले उत्पादों, हस्तशिल्प और कलाओं की जानकारी ली।

केंद्रीय गृह मंत्री ने ढोकरा शिल्प, टेराकोटा, वुड कार्विंग, सीसल कला, बांस व लौह शिल्प, जनजातीय वेशभूषा एवं आभूषण, तुम्बा कला, जनजातीय चित्रकला, वन औषधि, स्थानीय व्यंजन तथा लोक चित्रों पर आधारित प्रदर्शनी की सराहना की। उन्होंने कहा कि बस्तर की संस्कृति भारत की आत्मा का जीवंत स्वरूप है।

bastar pandum amit sha4

प्रदर्शनी में दंडामी माड़िया, अबूझमाड़िया, मुरिया, भतरा एवं हल्बा जनजातियों की पारंपरिक वेशभूषा और आभूषणों का प्रदर्शन किया गया। जनजातीय चित्रकला के माध्यम से आदिवासी जीवन, प्रकृति और परंपराओं की सजीव झलक प्रस्तुत की गई। वहीं, वैद्यराज द्वारा वन औषधियों का जीवंत प्रदर्शन भी किया गया।

स्थानीय व्यंजन स्टॉल में जोंधरी लाई के लड्डू, मंडिया पेज, आमट, चापड़ा चटनी, कुलथी दाल, पान बोबो, तीखुर जैसे पारंपरिक व्यंजन तथा लांदा और सल्फी पेय पदार्थ प्रदर्शित किए गए।

bastar pandum amit shah3

मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने कहा कि “बस्तर पंडुम जनजातीय संस्कृति को सहेजने और अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम है। राज्य सरकार जनजातीय कला, शिल्प और परंपराओं के संरक्षण के लिए निरंतर कार्य कर रही है।”

इस अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री ने बस्तर पंडुम की बारह विधाओं की प्रतियोगिता में विजेता दलों से भेंट कर उन्हें बधाई दी। कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, वन मंत्री  केदार कश्यप, विधायक किरण सिंह देव सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।

bastar pandum amit shah2

“बस्तर पंडुम 2026” संभाग स्तरीय प्रतियोगिता के विजेता

1.     जनजातीय नृत्य – गौर माड़िया नृत्य (बुधराम सोढ़ी, दंतेवाड़ा)
2.     जनजातीय गीत – पालनार दल (मंगली एवं साथी, दंतेवाड़ा)
3.     जनजातीय नाट्य – लेखम लखा (सुकमा)
4.     जनजातीय वाद्ययंत्र – रजऊ मंडदी एवं साथी (कोण्डागांव)
5.     जनजातीय वेशभूषा – गुंजन नाग (सुकमा)
6.     जनजातीय आभूषण – सुदनी दुग्गा (नारायणपुर)
7.     जनजातीय शिल्प – ओमप्रकाश गावड़े (कोया आर्ट्स, कांकेर)
8.     जनजातीय चित्रकला – दीपक जुर्री (कांकेर)
9.     जनजातीय पेय पदार्थ – भैरम बाबा समूह (उर्मीला प्रधान, बीजापुर)
10.     जनजातीय व्यंजन – श्रीमती ताराबती (दंतेवाड़ा)
11.     आंचलिक साहित्य – उत्तम नाईक (कोण्डागांव)
12.     बस्तर वन औषधि – राजदेव बघेल (बस्तर)



Related posts

कैबिनेट बैठक से पहले धर्मेन्द्र प्रधान पर सस्पेंस, पीएम मोदी के संकेतों के बाद तेज हुई चर्चाएं

News Desk

Flight Fare Hike पर सरकार सख्त, दिवाली-छठ में मनमाना किराया वसूली पर लगेगी लगाम; DGCA को मिल सकती है बड़ी जिम्मेदारी

News Desk

अरुणाचल पर भारत का रुख और मजबूत, नए नक्शे में 27 रणनीतिक स्थान दर्ज

News Desk