cgdemandium.com
राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय ख़बरें

हेट स्पीच विवाद में अनुराग ठाकुर और प्रवेश वर्मा को राहत बरकरार, सुप्रीम कोर्ट ने याचिका की खारिज

3A 116


नई दिल्ली

सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेताओं अनुराग ठाकुर और प्रवेश वर्मा को बड़ी राहत देते हुए उनके खिलाफ हेट स्पीच के आरोपों में एफआईआर दर्ज कराने की मांग वाली पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी है। 

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने सीपीएम नेता वृंदा करात की तरफ से दायर रिव्यू पिटीशन को खारिज करते हुए अपने पहले के फैसले को बरकरार रखा. याचिका में अनुरोध किया गया था कि दोनों नेताओं के खिलाफ कथित भड़काऊ भाषणों के मामले में एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया जाए। 

इससे पहले अप्रैल 2026 में भी सुप्रीम कोर्ट ने इसी मामले में दोनों नेताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग को ठुकरा दिया था. अब पुनर्विचार याचिका भी खारिज होने के बाद दोनों नेताओं को मिली राहत बरकरार रहेगी। 

यह मामला वर्ष 2020 में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ हुए प्रदर्शनों के दौरान दिए गए कथित भाषणों से जुड़ा है. आरोप था कि अनुराग ठाकुर और प्रवेश वर्मा के बयानों से नफरत फैलाने और माहौल बिगाड़ने की कोशिश हुई थी। 

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए पुनर्विचार याचिका भी खारिज कर दी. अब इस मामले में शीर्ष अदालत का पहले दिया गया आदेश ही प्रभावी रहेगा। 

वृंदा करात भागी-भागी सुप्रीम कोर्ट पहुंचीं तो जजों ने उल्टे पांव लौटाया

माकपा नेता वृंदा करात हेट स्पीच के एक मामले में बीजेपी नेता अनुराग ठाकुर और प्रवेश वर्मा को दी गई क्लीन चिट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची थीं। सुप्रीम अदालत ने यह कहकर उन्हें लौटा दिया कि फैसले में कोई गलती नहीं है। ऐसे में दोबारा विचार करने की जरूरत नहीं है। यह मामला 2020 में CAA का विरोध करने वालों के खिलाफ अनुराग ठाकुर और प्रवेश वर्मा के विवादित भाषण देने के मामले से जुड़ा था।

वृंदा करात ने की आपराधिक मुकदमा चलाने की मांग

   एक रिपोर्ट के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने हेट स्पीच के इस मामले में कहा कि 29 अप्रैल को सुनाए गए फैसले में कोई गलती नहीं थी। बेंच ने CPM की वृंदा करात की ओर से दायर रिव्यू पिटीशन (पुनर्विचार याचिका) को खारिज कर दिया। करात ने एक समुदाय के खिलाफ कथित तौर पर नफरत भरे भाषण देने के लिए इन नेताओं के खिलाफ FIR दर्ज करने और आपराधिक मुकदमा चलाने की मांग की थी।

    सुप्रीम कोर्ट का ताजा आदेश 29 जुलाई को इन-चैंबर कार्यवाही में पारित किया गया था, लेकिन हाल ही में इसे कोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड किया गया। बेंच ने रिव्यू पिटीशन पर ओपन कोर्ट में सुनवाई की अनुमति देने से भी इनकार कर दिया।

एक समुदाय के खिलाफ कथित तौर पर नफरत भरे भाषण देने के लिए अनुराग ठाकुर और प्रवेश वर्मा के खिलाफ FIR दर्ज करने और आपराधिक मुकदमा चलाया जाए।

वृंदा करात, माकपा ने अपनी याचिका में की मांग

सुप्रीम कोर्ट बोला-खारिज की जाती है रिव्यू पिटीशन
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा, ‘मौजूदा रिव्यू पिटीशन को ओपन कोर्ट में लिस्ट करने की अर्जी खारिज की जाती है। हमने रिव्यू पिटीशन और उसके समर्थन में दिए गए आधारों को देखा है। हमें आदेश में कोई गलती नहीं मिली और न ही ऐसी कोई स्पष्ट गलती दिखी जिसके लिए उस पर दोबारा विचार करने की जरूरत हो। इसलिए, रिव्यू पिटीशन खारिज की जाती है।’

हमें आदेश में कोई गलती नहीं मिली और न ही ऐसी कोई स्पष्ट गलती दिखी जिसके लिए उस पर दोबारा विचार करने की जरूरत हो। इसलिए, रिव्यू पिटीशन खारिज की जाती है।

सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने अप्रैल में दिए आदेश में क्या कहा था

    दोनों नेताओं के भाषणों की सामग्री की जांच करने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अप्रैल में कहा था कि नेताओं के खिलाफ कोई संज्ञेय अपराध नहीं बनता है और दिल्ली हाई कोर्ट के उस आदेश में दखल देने से इनकार कर दिया था जिसमें उन्हें क्लीन चिट दी गई थी।

    सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘हाई कोर्ट ने स्वतंत्र रूप से मामले की जांच करने के बाद यह माना है कि जिन भाषणों की बात हो रही है, उनसे किसी संज्ञेय अपराध के होने का पता नहीं चलता।’

    सुप्रीम कोर्ट ने आगे कहा- ‘हाई कोर्ट ने पाया कि ये बयान किसी खास समुदाय के खिलाफ नहीं थे और न ही इनसे हिंसा या सार्वजनिक अव्यवस्था भड़की। रिकॉर्ड में मौजूद सामग्री कथित भाषण, 26 फरवरी 2020 को ट्रायल कोर्ट में सौंपी गई स्टेटस रिपोर्ट और निचली अदालतों द्वारा दर्ज किए गए कारण शामिल हैं। इन पर सावधानीपूर्वक विचार करने के बाद हम इस निष्कर्ष से सहमत हैं कि कोई संज्ञेय अपराध नहीं बनता है।’

हाई कोर्ट ने स्वतंत्र रूप से मामले की जांच करने के बाद यह माना है कि जिन भाषणों की बात हो रही है, उनसे किसी संज्ञेय अपराध के होने का पता नहीं चलता। कोर्ट ने पाया कि ये बयान किसी खास समुदाय के खिलाफ नहीं थे और न ही इनसे हिंसा या सार्वजनिक अव्यवस्था भड़की।

सुप्रीम कोर्ट
वृंदा करात ने अपनी रिव्यू याचिका में क्या कहा था

    करात ने दिल्ली हाई कोर्ट और ट्रायल कोर्ट द्वारा अपनी याचिका खारिज किए जाने के बाद सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उन्होंने दोनों नेताओं द्वारा दिए गए कई भाषणों का जिक्र किया, जिसमें 27 जनवरी 2020 को ठाकुर द्वारा एक रैली में दिया गया भाषण भी शामिल है। जिसमें भड़काऊ नारा लगाया गया था।

    याचिका के अनुसार, वर्मा ने भी 27-28 जनवरी 2020 को कथित तौर पर नफरत फैलाने वाला भाषण दिया और शाहीन बाग के प्रदर्शनकारियों के खिलाफ ‘भड़काऊ’ भाषण दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के तर्क को गलत ठहराया

    हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाई कोर्ट और निचली अदालत का यह तर्क गलत था कि उनके खिलाफ कार्रवाई करने के लिए सक्षम अधिकारी से मंजूरी की आवश्यकता थी, लेकिन वह मामले के नतीजे से सहमत था।

    शीर्ष अदालत ने कहा कि मंजूरी की आवश्यकता FIR दर्ज करने या जांच करने के लिए नहीं थी और कोई भी ऐसी व्याख्या जो FIR दर्ज करने को पूर्व मंजूरी पर निर्भर बनाती है, वह इस कानूनी व्यवस्था को उलट देगी और जांच से संबंधित प्रावधानों को अव्यावहारिक बना देगी।



Related posts

टैक्सपेयर्स के लिए बड़ी खबर! लोकसभा में पेश होगा इनकम टैक्स संशोधन बिल, बैंकिंग सेक्टर पर भी हो सकते हैं अहम फैसले

News Desk

18वीं लोकसभा का पहला सत्र नए संसद भवन में शुरू, PM मोदी ने सांसद के रूप में ली शपथ

Muskan Sharma

India-France defence partnership gets major boost: भारत-फ्रांस रक्षा साझेदारी को बड़ा बूस्ट, 114 मेक इन इंडिया राफेल जेट को मंजूरी

News Desk