cgdemandium.com
छत्तीसगढ़समाचार

तमिलनाडु में RTI को लेकर सियासी घमासान, दबाव के बीच विजय सरकार ने वापस लिया आदेश

113 23


चेन्नई
तमिलनाडु में अभिनेता से राजनेता बने विजय थलापति के नेतृत्व वाली टीवीके (TVK) सरकार को कड़े विरोध के बाद आखिरकार अपना एक बड़ा फैसला वापस लेना पड़ा है।

सरकार ने उस आदेश को रद कर दिया है, जिसके तहत ‘पब्लिक डिपार्टमेंट’ यानी सार्वजनिक कानून-व्यवस्था विभाग को सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम, 2005 के दायरे से बाहर करने की कोशिश की गई थी। इस फैसले पर चौतरफा आलोचनाओं के बाद सरकार ने यह कदम उठाया है।

क्या था पूरा मामला और क्यों हुआ विरोध?
इस बात को ऐसे समझा जा सकता है कि मानव संसाधन प्रबंधन विभाग की तरफ से 21 सितंबर 2026 को जारी किए गए सरकारी आदेश के तहत आरटीआई अधिनियम की धारा 24 की उप-धारा (4) का हवाला देते हुए कानून-व्यवस्था विभाग को एक ‘खुफिया और सुरक्षा संगठन’ मानकर आरटीआई के दायरे से छूट देने का प्रयास किया गया था।

बता दें कि सार्वजनिक कानून-व्यवस्था के दायरे में कई संवेदनशील विषय आते हैं, जैसे कि पुलिस फायरिंग और हिरासत में हुई मौतों व पुलिस टॉर्चर की जांच रिपोर्ट। सांप्रदायिक और जातिगत संघर्षों से जुड़ी रिपोर्टें और राजनीतिक रूप से संवेदनशील मामलों को वापस लेने के अनुरोध और मानहानि के मामलों से जुड़ी अभियोजन मंजूरी।

विपक्ष का क्या था तर्क?
बात अब इस फैसले के विरोध की करें तो आलोचकों और विपक्षी नेताओं का कहना था कि अगर इस विभाग को आरटीआई से बाहर कर दिया जाता, तो जनता से ये तमाम महत्वपूर्ण जानकारियां छिप जातीं, जिससे पारदर्शी शासन पर सवाल खड़े होते।

फैसले के विरोध में खुलकर सामने आए विपक्ष
दूसरी ओर सरकार के इस फैसले के खिलाफ विपक्ष और विभिन्न दलों के नेता खुलकर विरोध में उतर आए थे। सीपीएम (CPM) सांसद वेंकटेशन ने कड़ा ऐतराज जताते हुए कहा था कि यह कदम तमिलनाडु को एक पुलिस राज में बदलने की खुली कोशिश है और सरकार को तुरंत यह आदेश वापस लेना चाहिए।

कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने इस कदम की आलोचना करते हुए कहा कि आरटीआई कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार का एक ऐतिहासिक फैसला था, जिसका उद्देश्य देश में ‘लोकतांत्रिक जवाबदेही’ को मजबूत करना था। उन्होंने कहा कि इस तरह महत्वपूर्ण सूचनाओं को जनता से छिपाना सही मिसाल नहीं है।

विरोध के बाद राज्य सरकार का यू-टर्न
गौरतलब है कि शुरुआत में बचाव की मुद्रा अपनाते हुए टीवीके मंत्रियों ने तर्क दिया था कि इस फैसले से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर कोई असर नहीं पड़ेगा। मंत्री सीटीआर निर्मल कुमार ने सफाई दी थी कि इस कदम का उद्देश्य केवल सामुदायिक संघर्षों से जुड़े विवरणों को सुरक्षित रखना था, क्योंकि लोग इसे लेकर लगातार आरटीआई मांग रहे थे। वहीं मंत्री राजमोहन ने कहा था कि सरकार पारदर्शिता के प्रति प्रतिबद्ध है।

हालांकि, बढ़ते राजनीतिक दबाव और जनता की नाराजगी को भांपते हुए मंत्री सीटीआर निर्मल कुमार ने पहले ही संकेत दे दिए थे कि अगर आम जनता में असंतोष है, तो इस मामले पर मुख्यमंत्री के साथ चर्चा करके पुनर्विचार किया जाएगा। आखिरकार, विपक्ष के कड़े विरोध के बाद सरकार ने शासनादेश को रद्द करते हुए अपना यह विवादास्पद फैसला वापस ले लिया है।



Related posts

रेलवे का स्पेशल चेकिंग अभियान, टिकट-आईडी में गलती पर लगेगा ₹500 जुर्माना

News Desk

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने की विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह से सौजन्य मुलाकात

Muskan Sharma

विधानसभा अध्यक्ष डॉ रमन सिंह और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय नवा रायपुर में बन रहे विधानसभा के नवीन भवन निर्माण की प्रगति की समीक्षा

Muskan Sharma