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Naxalites surrender in Sukma: सुकमा में 22 नक्सलियों का आत्मसमर्पण, मुख्यधारा में लौटे; पुनर्वास नीति पर जताया भरोसा

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सुकमा। छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में 22 नक्सलियों ने हिंसा का रास्ता छोड़ पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। नक्सल उन्मूलन नीति और ‘पूना मारगेम पुनर्वास से पुनर्जीवन’ अभियान से प्रभावित होकर इन सभी ने मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया। आत्मसमर्पण करने वालों ने सरकार के साथ मिलकर विकास कार्यों में सहयोग करने की बात कही है।

पुलिस के अनुसार जिले में लगातार चल रहे नक्सल विरोधी अभियान, नए सुरक्षा कैंपों की स्थापना, सुदृढ़ सड़क संपर्क और बढ़ते विकास कार्यों के कारण माओवादी संगठन का प्रभाव कमजोर पड़ रहा है। इसी का परिणाम है कि बड़ी संख्या में नक्सली अब पुनर्वास नीति पर भरोसा जता रहे हैं।

सुकमा पुलिस अधीक्षक किरण चव्हाण ने कहा कि संगठन अब कमजोर हो चुका है। 22 नक्सलियों का आत्मसमर्पण इसी दिशा में बड़ी सफलता है। सभी आत्मसमर्पित माओवादियों को शासन की पुनर्वास नीति के तहत आवश्यक लाभ और सहायता प्रदान की जाएगी।

आत्मसमर्पण करने वालों के नाम:
गोंचे हुंगा (जीआरडी मिलिशिया कमांडर), मड़कम बंडी, माड़वी हांडा, मड़कम नंदा, मड़कम रामा, मड़कम सोमड़ा, मिडियाम आयता (आरपीसी जंगल कमेटी अध्यक्ष), मड़कम चैतू, माड़वी हूंगा, लक्ष्मी मुचाकी (केएएमएस सदस्या), गोंचे उर्फ मड़कम हुंगा, माड़वी दूला, कुंजाम केसा (आरपीसी कृषि कमेटी अध्यक्ष), वेको विज्जा (पंचायत मिलिशिया सदस्य), वेको हड़मा (पंचायत मिलिशिया सदस्य), मुचाकी सुक्का (जनताना सरकार उपाध्यक्ष), माड़वी जोगा (आरपीसी डीएकेएमएस सदस्य), मड़कम पांडू (आरपीसी डीएकेएमएस उपाध्यक्ष), नुप्पो देवा, भोगाम दसरू उर्फ सोना, सलवम लखमा और जगत उर्फ मुचाकी भीमा।

पुलिस ने कहा कि आगे भी नक्सलियों से मुख्यधारा में लौटने की अपील जारी रहेगी, ताकि क्षेत्र में शांति और विकास का मार्ग और मजबूत हो सके।



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