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कबीरधाम (कवर्धा)

छत्तीसगढ़ रजत महोत्सव 2025 का भव्य शुभारंभ : लोक संस्कृति, भक्ति और रंगारंग प्रस्तुतियों से महका कवर्धा, भारती बंधु के कबीर भजन और सूफी गायन ने बांधा समां

छत्तीसगढ़ रजत महोत्सव 2025 का भव्य शुभारंभ : लोक संस्कृति, भक्ति और रंगारंग प्रस्तुतियों से महका कवर्धा, भारती बंधु के कबीर भजन और सूफी गायन ने बांधा समां


कवर्धा | छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना के 25 वर्ष पूर्ण होने पर कवर्धा का मैदान रविवार शाम लोकसंस्कृति, गीत-संगीत और छत्तीसगढ़ी परंपराओं की खुशबू से महक उठा। आचार्य पंथ श्री गृथमुनि नाम साहेब शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय मैदान में तीन दिवसीय “रजत राज्योत्सव” का आगाज़ भव्य आतिशबाज़ी, पारंपरिक नृत्य और सुरों की मधुर ध्वनियों के बीच हुआ। पूरे आयोजन स्थल पर छत्तीसगढ़ की माटी, मया और महतारी की झलक चारों ओर दिखाई दी।

मंच पर सजी छत्तीसगढ़ी लोक रंगों की सतरंगी शाम

राज्योत्सव के पहले दिन मंच पर प्रदेश के लोक रंगों की सतरंगी छटा बिखरी। कार्यक्रम की शुरुआत कस्तूरबा आवासीय विद्यालय के विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत लोक नृत्य ‘छत्तीसगढ़ दर्शन – प्रमुख त्यौहार’ से हुई। विद्यार्थियों ने पारंपरिक वेशभूषा, मांदर की थाप और जोशभरी ताल पर नाचते हुए छत्तीसगढ़ की संस्कृति, पर्व और लोकजीवन की सुंदर झलक पेश की। दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट से उनका उत्साह बढ़ाया।

‘मयारु के मया’ में गूंजी माटी की महक

इसके बाद लोक कलाकार धनीदास मानिकपुरी और उनके दल ने ‘मयारु के मया’ कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ महतारी को समर्पित गीत “मै माथ नवाओं ओ मोर ए माटी महतारी” प्रस्तुत किया। कर्मा गीत “करमा के ताल मा, मांदर के थाप मा आ संगी झूम के नाचो” पर दर्शक झूम उठे। उनकी प्रस्तुति ने मंच पर छत्तीसगढ़ी माटी की सोंधी खुशबू और लोकभावना का रंग घोल दिया।

भारती बंधु की कबीरवाणी से गूंजा कवर्धा

कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रहे पद्मश्री डॉ. भारती बंधु, जिन्होंने अपने सुरीले स्वर में कबीर भजनों और सूफी गायन से श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। उनकी प्रसिद्ध रचना “छाप तिलक सब छीनी रे मोसे नैना मिला के” पर पूरा सभागार भक्ति और आध्यात्मिकता के रस में डूब गया। उनकी प्रस्तुति के दौरान दर्शक देर तक मंत्रमुग्ध होकर ताली बजाते रहे।

फनकारों की जुगलबंदी और हास्य प्रस्तुति ने बढ़ाया मनोरंजन

राज्योत्सव के मंच पर कवर्धा के फनकार माधवेश केशरी और ओमप्रकाश चंदेल ने “सलामत रहे दोस्ताना हमारा”, “लिखे जो खत तुझे” जैसे सदाबहार गीतों से समां बाँध दिया। उनकी सुरीली जुगलबंदी पर दर्शकों ने मोबाइल की फ्लैशलाइट जलाकर उत्साह जताया।

वहीं हास्य कलाकार कौशल साहू और अनूप श्रीवास्तव की मिमिक्री और कॉमिक प्रस्तुतियों ने दर्शकों को ठहाकों से लोटपोट कर दिया। देश के नामचीन नेताओं और अभिनेताओं की आवाज़ में की गई मिमिक्री ने पूरे माहौल में हंसी और हल्कापन घोल दिया।

 

आतिशबाज़ी से झिलमिलाया आसमान, प्रदर्शनियों में दिखा विकास

राज्योत्सव के शुभारंभ पर मंच के आसपास रंग-बिरंगी रोशनी और आतिशबाज़ी ने पूरे मैदान को झिलमिला दिया। कार्यक्रम के पूर्व अतिथियों ने विभागीय विकास प्रदर्शनियों का अवलोकन किया, जिसमें शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, पर्यटन और महिला सशक्तिकरण से जुड़ी उपलब्धियों को दर्शाया गया था।

भव्य आयोजन में उमड़ा जनसैलाब

शाम ढलते-ढलते मैदान में हजारों की भीड़ उमड़ पड़ी। छत्तीसगढ़ की लोक धुनों पर दर्शक झूमते नजर आए। पहले दिन का राज्योत्सव भक्ति, संस्कृति और लोक रंगों की ऐसी संगम शाम में बदल गया, जिसने कवर्धा की धरती को उल्लास, मया और संगीत से सराबोर कर दिया।



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