cgdemandium.com
छत्तीसगढ़समाचार

कमजोर मानसून का खतरा घटा, सितंबर में अच्छी बारिश के संकेत

165


 नई दिल्ली
 देश भर में मजबूत होते एल नीनो के असर के कारण मानसून सामान्य से कम रहने का जोखिम बना हुआ है, इस बीच विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) की लेटेस्ट रिपोर्ट ने राहत की उम्मीद जगाई है।

WMO की रिपोर्ट के अनुसार, हिंद महासागर में ‘पॉजिटिव आईओडी’ (Positive Indian Ocean Dipole) विकसित होने की संभावना है, जिससे एल-नीना का असर काफी हद तक बेअसर हो सकता है। इससे दक्षिण भारत समेत देश के अन्य हिस्सों में बारिश की स्थिति में सुधार देखने को मिल सकता है।

दरअसल, एल-नीनो मध्य और पूर्वी उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर के सतह जल के गर्म होने का एक जलवायु पैटर्न (प्रवृत्ति) है, यह भारत में कमजोर मानसून और भीषण गर्मी से जुड़ा हुआ है।

वहीं, दूसरी तरफ, इंडियन ओशन डिपोल (IOD) का संबंध उष्णकटिबंधीय हिंद महासागर के पश्चिमी और पूर्वी हिस्सों के समुद्री सतह तापमान के अंतर से है। यह मजबूत मानसूनी हवाओं के बनने में मदद करता है। जिससे बारिश होने की संभावना बढ़ जाती है।

फिहलाल IOD विकसित हो रही है, जिसके कारण हिंद महासागर का पैटर्न सामान्य हो जाएगा। इससे मानसून के बेहतर होने की उम्मीद जगी है। अगर डब्ल्यूएमओ का पूर्वानुमान सच होता है, तो दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में, उन क्षेत्रों में जहां 1 अगस्त तक हुई बारिश में 22% की भारी कमी दर्ज की गई थी, वहां सामान्य रूप से वर्षा की स्थिति में सुधार की संभावना है।

कुछ अंतरराष्ट्रीय मौसम पूर्वानुमान केंद्रों के जलवायु अनुमानों का हवाला देते हुए यह भी कहा कि सितंबर के दौरान ‘सकारात्मक’ (Positive) IOD स्थितियां विकसित होने की संभावना है। इससे अच्छी बारिश होने की संभावना है।

मौसम विज्ञानियों की निगाह अब हिंद महासागर में विकसित होने वाले इंडियन ओशन डायपोल (IOD) पर टिकी है, जो अभी न्यूट्रल है, लेकिन सितंबर में यह पॉजिटिव हो सकता है। ऐसा हुआ तो यह एल-नीनो की चपेट में आए मानसून को नई ताकत मिल सकती है।

भारत में कैसे कम हो जाएगा एल-नीनो का प्रभाव?
IOD के पॉजिटिव होने पर हिंद महासागर से भारत की ओर अधिक नमी पहुंचती है, जिससे मानसून को अतिरिक्त ऊर्जा मिलती है और एल-नीनो का नकारात्मक प्रभाव काफी हद तक कम हो सकता है।

हालांकि, भारत का मानसून केवल एल-नीनो से तय नहीं होता। बंगाल की खाड़ी में बनने वाले कम दबाव के क्षेत्र, मानसूनी ट्रफ की स्थिति और हिंद महासागर की परिस्थितियां भी वर्षा की मात्रा एवं वितरण को प्रभावित करती हैं। यही वजह है कि कई बार मजबूत एल-नीनो के दौरान भी देश के कुछ हिस्सों में सामान्य या उससे अधिक बारिश देखने को मिलता है।



Related posts

नारायणपुर के अबूझमाड़ में कड़ी सुरक्षा के बीच वोटिंग:सुबह से मतदान करने मतदाताओं का तांता लगा हुआ है।

Muskan Sharma

मुख्यमंत्री ने कैलाश खेर का किया छत्तीसगढ़ में आत्मीय स्वागत

Muskan Sharma

शिक्षक दिवस पर पंडरिया में भव्य शिक्षक अभिनंदन समारोह, विधायक भावना बोहरा ने 1500 से अधिक शिक्षकों का किया सम्मान

News Desk