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Heatwave in India: 365 में 360 दिन गर्मी की मार, क्लाइमेट चेंज और अल-नीनो पर उठे बड़े सवाल

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 नई दिल्ली

साल 2025 भारत के लिए मौसम के लिहाज से बेहद मुश्किल था. सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट – CSE की रिपोर्ट के मुताबिक, पूरे साल में 365 में से 360 दिन देश के किसी न किसी हिस्से में मौसम की भयानक घटनाएं हुईं. इन घटनाओं में 4421 लोगों की मौत हुई. करीब 1.74 करोड़ हेक्टेयर फसल प्रभावित हुई. बढ़ता क्लाइमेट चेंज और अल-नीनो जैसे मौसमीय पैटर्न भारत में मौसम को पहले से ज्यादा अनिश्चित बना रहे हैं। 

2025 में मौसम ने तोड़े कई रिकॉर्ड
2025 में देश के सभी 28 राज्यों और 8 केंद्र शासित प्रदेशों में किसी न किसी तरह का बिगड़ा हुआ मौसम दर्ज किया गया. यानी पूरे साल ऐसा कोई इलाका नहीं बचा, जहां मौसम का असर न दिखा हो. 2025 में देश के करीब 99% दिनों में कहीं न कहीं लू, भारी बारिश, बाढ़, बिजली गिरने, ओला पड़ने या तूफान जैसी घटनाएं हुईं. यह पिछले साल के मुकाबले ज्यादा है. 2024 में ऐसे मौसम की घटनाएं साल के 88 फीसदी दिनों में दर्ज हुई थीं। 

मौतों का आंकड़ा भी बढ़ा है. 2024 में 3393 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 2025 में यह बढ़कर 4421 हो गई. खेती को हुआ नुकसान भी कई गुना बढ़ गया. 2024 में करीब 36 लाख हेक्टेयर फसल प्रभावित हुई थी, लेकिन 2025 में यह बढ़कर 1.74 करोड़ हेक्टेयर तक पहुंच गई। 

सबसे ज्यादा फसल का नुकसान महाराष्ट्र में हुआ, जहां करीब 84 लाख हेक्टेयर खेती प्रभावित हुई. इसके बाद कर्नाटक और मध्य प्रदेश का नंबर रहा. वहीं हिमाचल प्रदेश में सबसे ज्यादा 267 दिन भयानक मौसम दर्ज किया गया. केरल में 173 दिन और मध्य प्रदेश में 162 दिन ऐसे हालात बने रहे. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 2025 में 1.81 लाख से ज्यादा घरों को नुकसान पहुंचा। 

अब सिर्फ मानसून नहीं, पूरे साल बदल रहा है मौसम
रिपोर्ट बताती है कि अब चरम मौसम सिर्फ मानसून तक सीमित नहीं है. मार्च, अप्रैल और मई जैसे महीनों में भी तेज गर्मी, अचानक बारिश, आंधी और ओले पड़ने जैसी घटनाएं बढ़ रही हैं. कई जगहों पर कुछ ही दिनों के अंदर मौसम पूरी तरह बदल जाता है. इसका सीधा असर खेती, पानी और लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ रहा है। 

अल-नीनो से क्यों बढ़ सकती है परेशानी?
वैज्ञानिकों का कहना है कि हर खतरनाक मौसम की घटना की वजह अल-नीनो नहीं होता. लेकिन जब अल-नीनो सक्रिय होता है, तो भारत के मौसम का पैटर्न बदल सकता है. कई इलाकों में बारिश कम हो सकती है और गर्मी बढ़ सकती है. वहीं कुछ जगहों पर कम समय में बहुत ज्यादा बारिश भी हो सकती है। 

अगर अल-नीनो का असर और क्लाइमेट चेंज साथ-साथ हों, तो मौसम और ज्यादा असामान्य हो सकता है. यही वजह है कि वैज्ञानिक लगातार ऐसे मौसम पर नजर रखने की बात कहते हैं। 

2025 के आंकड़े साफ बताते हैं कि बेहद खराब मौसम अब भारत में पहले से ज्यादा आम होता जा रहा है. इसका असर सिर्फ लोगों की जान पर नहीं, बल्कि खेती, घरों और अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर क्लाइमेट चेंज की रफ्तार नहीं थमी और अल-नीनो जैसे मौसमी पैटर्न असर दिखाते रहे, तो आने वाले वर्षों में ऐसे हालात और गंभीर हो सकते हैं। 



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